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- Commercial LPG Quota Increased To 70% | Centre Directs States To Boost Supply For Industries Amid Gas Crisis
नई दिल्ली19 मिनट पहले
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केंद्र सरकार ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च) को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के एलोकेशन यानी कोटा को 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन उद्योगों को मिलेगा जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं।
सरकार ने साफ किया है कि स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और केमिकल जैसे ज्यादा लेबर वाले सेक्टर को प्राथमिकता दी जाएगी। मिडल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से भारत में LPG की सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी।
इससे निपटने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों को लेटर भेजा है।
मंत्रालय ने कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए सप्लाई बढ़ाने के लिए यह आदेश जारी किया है। पहले यह कोटा केवल 50% था, जिसे अब बढ़ाकर प्री-क्राइसिस लेवल के 70% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
6 सेक्टर्स को प्राथमिकता मिलेगी
सरकार के आदेश के मुताबिक, उन उद्योगों को पहले LPG दी जाएगी जहां लेबर यानी मजदूरों की संख्या ज्यादा है और जो दूसरे जरूरी उद्योगों को सपोर्ट करते हैं।
- स्टील
- ऑटोमोबाइल
- टेक्सटाइल
- डाइज
- केमिकल्स
- प्लास्टिक्स
PNG का विकल्प अपनाना जरूरी होगा
सरकार ने इस बढ़े हुए कोटे के साथ एक शर्त भी रखी है। अतिरिक्त 20% LPG का फायदा उठाने के लिए कॉमर्शियलऔर इंडस्ट्रियल ग्राहकों को तेल कंपनियों (OMCs) के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
साथ ही उन्हें अपने शहर की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के पास पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। सरकार चाहती है कि उद्योग धीरे-धीरे LPG से पीएनजी की ओर शिफ्ट हों।
स्पेशल हीटिंग वाले उद्योगों को नियमों में छूट
आदेश में एक अहम राहत भी दी गई है। अगर किसी प्रोसेस इंडस्ट्री को ऐसी स्पेशल हीटिंग की जरूरत है जिसे नेचुरल गैस (PNG) से पूरा नहीं किया जा सकता, तो उनके लिए पीएनजी आवेदन की शर्त को हटा दिया गया है। यानी ऐसे उद्योगों को बिना किसी शर्त के बढ़ा हुआ LPG कोटा मिलता रहेगा।

सरकार की राज्यों को सुधार लागू करने की सलाह
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की है कि वे 10% रिफॉर्म-बेस्ड एलोकेशन का तुरंत लाभ उठाएं। अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नॉन-डोमेस्टिक LPG के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। जिन राज्यों ने अभी तक ऐसा नहीं किया है, वहां सरकारी तेल कंपनियां सीधे सिलेंडर रिलीज कर रही हैं।
रेस्टोरेंट्स-ढाबों को पहले ही मिल चुकी राहत
इससे पहले 21 मार्च को सरकार ने जो 20% अतिरिक्त एलोकेशन दिया था, उसमें रेस्टोरेंट्स, ढाबे, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को प्राथमिकता दी गई थी।
इसके अलावा कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले FTL (फ्री-ट्रेड LPG) सिलेंडरों की सप्लाई भी सुनिश्चित की गई है। सरकारी डेटा के मुताबिक, 25 मार्च तक प्रवासी मजदूरों को 37,000 से ज्यादा 5 किलो वाले सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
क्या होता है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’?
‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर अब 70% किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली LPG आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो।
ईरान-अमेरिका और इजराइल जंग से गैस की कमी
ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। इस अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया।
इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया और सप्लाई प्रभावित हुई। यही रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश का करीब 80-85% LPG यहीं से आता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा गैस बाहर से मंगाता है। इसी वजह से देश में LPG की कमी जैसी स्थिति बनी। हालांकि, सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा और साफ किया कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है।

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केंद्र ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। 23 मार्च से राज्यों को अब पहले के मुकाबले 20% ज्यादा गैस दी जाएगी। इसके बाद राज्यों को मिलने वाली कुल सप्लाई संकट से पहले के स्तर (प्री-क्राइसिस लेवल) के 50% तक पहुंच जाएगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। इसमें कहा गया कि सामुदायिक रसोई, रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों और इंडस्ट्रियल कैंटीन को प्राथमिकता दी जाए। पूरी खबर पढ़ें…







